बुधवार, सितंबर 30, 2009

meri kahani


दोस्तों आज में कुछ पर्सनल लाइफ के बारे में कुछ बताने जा रहा हु ।
दोस्तों जिंदगी में प्यार सब कुछ होता हैं , ये मेरा मानना हैं ।
क्योकि जिंदगी की शुरुवात ही प्यार से होती हैं ।
मेरा मानना है की हमे अगर बचपन में माँ बाप का प्यार नही मिला तो बचपन बेकार हो जाता हैं ,
जिसके सर से माँ बाप का साया उठजाता हैं ,
उसको अपनी जिंदगी में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं ,खेर माँ बाप का प्यार तो सभी को मिले ये मेरी भगवान से हाथ जोड़कर प्राथना हैं ,
आज में प्यार के बारे में , मेरी जिंदगी का एक अनुभव आपके सामने रखना चाहता हु,
दोस्तों बचपन में माँ बाप का प्यार तो बहुत मिला , लेकिन कहते हे ना बच्चा जेसे जेसे बड़ा होता हैं ,
वेसे वसे उसकी सोच भी बदल जाती हैं , ये सही हैं दोस्तों ,
में जब छोटा था तब से में किसी को कुछ हद तक पसंद करता आया हु ,
दोस्तों प्यार एक इसी चीज़ हे जो पता नही कब किसके साथ हो जाए
उस समय मेरी उम्र कुछ आठ या दस साल की थी तब हम जेनी स्कूल जाया करते थे ,
वह मैंने एक इसी लड़की को देख जो बिल्कुल मासूम सी थी ,
मन ही मन में यही सोच रहा था की राहुल ये तेरे लिए ही बनी हैं ,
दोस्तों उस समय तो मुझे प्यार क्या होता हे इसका सही मायना तो पता ही नही था ,
लेकिन फिर भी प्यार कर बेठा , सुना है की प्यार में उम्र की कोई सीमा नही होती बस प्यार हो जाता हैं ,
फ़िर भी में उससे बात करने की हिम्मत नही जुटा पाया ,
फ़िर ना जाने किस तरह वक्त बीतता गया जब में कुछ समजने लगा ,
तब में रोज़ उसकी सिर्फ़ एक जलक देखने के लिए दिन में दस बार उसकी गली में चक्कर लगाता वो जब मन्दिर जाती उसके साथ साथ मन्दिर जाना
दोस्तों ये तो एक पागलपन था फ़िर घर से पेसे चुराकर कर उसको चोकलेट देना और उसकी सहेलियों को भी
देनी, मन्दिर में एक दुसरे के सामने बैठाना, बार बार उसको देखना ,
भले ही वो मुझे ना देखती लेकिन अपने दोस्तों को कहना की उसने मुझे देखा,
और इन चोटी चोटी बातो से दिल को बड़ी खुशी मिलती थी , धीरे धीरे हम बड़े होते गऐ
उसी तरह मेरा प्यार भी उसके लिए बढता गया, उसको खुश देख कर भी खुश हो जाता था,
पर दोस्तों मुझे नही पता था की में उससे इतना प्यार करता हु ,
सच तो यह है की में उससे बहुत प्यार करता था शायद जिंदगी से भी ज़्यादा ,
वो भले ही मजाक समजती हो पर मेरे लिए इतना प्यार सब कुछ था ,
जब में अपनी दुकान पर बेठता था दोपहर में तो वो अपने पापा के लिए चाय लेकर
उनकी दुकान पर जाती थी में उसको एक नज़र से देखता था वो नज़रे जुका के वह से आगे
निकल जाती थी बस उसकी यही अदा मुझे बहुत पसंद थी वो बहुत भोली थी मासूम थी
और में उसका पागल दीवाना था , उसकी मासूमियत मुझे उसकी और आकर्षित करती थी ,
वो उस समय इतनी khubsurat नही थी लेकिन मेरे लिए सबसे खुबसूरत थी वो वो वो वो

दोस्तों उसके बारे में, में जो कुछ कहू वो कम हे बस इसी बात का तो गम हैं , जब मुझे पता चला की अब वो मेरे साथ एक
ही क्लास में आने वाली है दोस्तों उस समय मेरी जो खुशी थी शयद में उस खुशी को बयां नही कर सकता , जब वो पहली बार क्लास में आई थी तो उसकी जगह ठीक मेरी पास वाली कुर्सी पर थी हम दोनों के बिच का फासला सिर्फ़ एक कदम का ही था , उस समय वो मुझसे बात करने में शर्माती थी उसकी सहेलिया उसको परेशान करती थी और मेरे दोस्त मुझे छेड़ते थे . हम दोनों बी बाद में एक अच्छे दोस्त बन गए थे में भी उसके साथ बहुत मस्ती करता था कभी कभी उसको छेड़ता भी था लेकिन ये सिलसिला ज़्यादा समय तक नही चला बाद में किसी कारनवश मुझसे नाराज़ हो गई लेकिन दोस्तों में उससे कभी भी नाराज़ नही हो सकता हु मेरा तो पहला प्यार हैं वो मेरी जिंदगी थी वो उसके साथ पड़ने का मोका सिर्फ़ एक साल तक ही मिला इसके बाद में कुवैत आगया लेकिन दोस्तों उस एक साल में मानो मेने पुरी जिंदगी जी हे क्योकि जो वक्त चला जाता हे वो लोट कर वापस नही आता, में उससे इतना प्यार क्यो करता हु , शायद इसका जवाब मेरे पास भी नही हैं , दोस्तों किसी से अगर प्यार करो तो उसे कभी प्यार में धोखा मत देना कभी बेवफाई मत करना क्योकि इसके बाद जो ,
जो उसका हाल होता है वो सिर्फ़ वही समजता है जिसने ठोकर खाई है ,।
दोस्तों अभी मेरे पास उसका प्यार नही रहा उसने किसी और से शादी करली ,
लेकिन उसमे भी उसकी कोई गलती नही थी , वो उसके पापा से डरती थी ,
उनसे खुलकर बात नही करती थी , शयद यही वजह रही होगी जो आज
ये हाल हुआ है ,
मोहब्बत............... तो वो चीज़ हैं


रविवार, सितंबर 27, 2009

हम कितने पागल हैं


फूलो को चुने की खातिर काँटों से जख्मी होते हैं ,

जो जोली में आ गिरते थे उन्हें चुने से डर जाते थे ,

जब बारिश बरसा करती थी ... हम छतरी में चुप जाते थे ,

और जलती धुप में नंगे पांव हम चत पर उछला करते थे ,

जब पास वो होता था तो, देख उसको ना सकते थे ,

जब दूर चला जाता था वो, हम आहट उसकी सुनते थे ,

जब सारी दुनिया सोती थी, हम चाँद से खेला करते थे ,

जब सारी दुनिया उठ जाती, हम थक कर सो जाते ,

हम कीतने पागल होते थे.... हम कैसे पागल होते थे ,

हम आज भी वेसे ही पागल हैं........

*<*<* बस तेरा नाम यही तो हैं *<*<*

राहुल कुमार पचोरी

******प्यार का मारा***** प्यार हमार *******

बदनाम



कभी तो चाँद आसमान से उतरे और आम हो जाये ,

तेरे नाम की एक खुबसूरत शाम हो जाये ,

अजाब हालत हुए की दिल का सोदा हो गया ,

मुहब्बत की हवेली जिस तरह नीलम हो जाए ,

में ख़ुद भी तुजसे मिलने की चाहत नही करूँगा ,

क्योंकि नही चाहता कोई मेरे लीये बदनाम हो जाये ,

उजाले अपनी यांदो के मेरे साथ रहने दो ,

जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाये ॥

राहुल कुमार पचोरी
*****प्यार का मारा *****प्यार हमारा *****

पगली लड़की डॉ. कुमार विशवाश द्वारा

अमावास की काली रातो में दिल का दरवाज़ा खुलता हैं ,
जब दर्द की काली रातो में आंसू के संग होता हे ,
जब पिछवाडे के कमरे में हम निपट अकेले होते हे ,
जब गाडिया टिक-टिक चलती हे सब सोते है हम रोते है ,
जब बार बार दोहराने से सारी यांदे चुक जाती है ,
जब उंच नीच समजने में माथे की नस दुःख जाती हे ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी गद्दारी लगता है ,
जब पोथे खाली होते हे जब हर कोई सवाली होते है ,
जब गजले रास नही आती अफसाने गली होते है ,
जब बांसी फीकी धुप समेटे दिन जल्दी ढल जाता है ,
जब सूरज का ल्स्खर चत से गलियों में देर से जाता है ,
जब जल्दी गर जाने की इच्चा मन ही मन घुट जाती है ,
जब कोलेज से गर जाने वाली पहली बस छुट जाती है ,
जब बेमन से खाना खाने पर माँ गुस्सा हो जाती है ,

जब लाख मना करने पर भी पारो पड़ने आ जाती है ,
जब अपना मनचाहा हर काम लाचारी लगता है ,
तब उस पगली लड़की के बिन मरना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है ,

जब कमरे में सन्नाटे की आवाज सुनाइ देती है ,
जब दर्पण में आँखों के नीचे जाही दिखाई देती है ,
जब बडकी भाभी कहती हे कुछ सेहत का भी ध्यान करो ,
क्या लिखते हो लल्ला दिनभर कुछ सपनो का सम्मान करो ,
जब बाबा वाली बैठक में कुछ रिश्ते वाले आते हैं ,
जब साड़ी पहने एक लड़की का फोटो लाया जाता हैं ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्धारी लगता हैं ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भरी लगता हैं ,


दीदी कहती हे उस पगली लड़की की कुछ ओकात नही ,
उसके दिल में भइया तेरे जैसा जस्बात नही ,
वो पगली लड़की मरी खातिर नौ दिन भूकी रहती है ,
चुप- चुप सारे व्रत करती है , पर मुझसे कभी न कहती है,
जो पगली लड़की कहती है में प्यार तुम्ही से करती
लेकिन में हूँ मजबूर बहुत अम्मा -बाबा से डरती हूँ ,
उस पगली लड़की पर अपना कुछ भी अधिकार नही बाबा ,
यह कथा- कहानी किस्से हैं कुछ भी तो सार नहीं बाबा ,
बस उस पगली लड़की के संग जीना फुलवारी लगता हैं ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भरी लगता है ,
******प्यार का मारा********* प्यार हमारा************
राहुल कुमार पचोरी

शनिवार, सितंबर 26, 2009

प्यार का मारा


हम इस तरह उनका एहसास रखते है,
हजारो यादों को अपने पास रखते है,
खुदा नसीब करे हर खुशी उनको ,
जो हमे अपने "दिल " क पास रखते है॥



पलकों में कैद न रहने दो सपनो को ,
उन्हें तो हककितमें बदलना है।
इन आँखों की तो एक ही तमन्ना है ,
आपको हर वक़्त मुस्कुराते देखना है ॥


तुजे चाहने वाले कम नही होंगे ,
वक़्त के साथ शायद हम नही होंगे।
चाहे किसी को भी कितना ही प्यार देना ,
लेकिन तेरी यांदो के हकदार सिर्फ़ हम ही होंगे ॥


दुआ हे आप युही मुस्कराना ,
आँखों में कभी नमी मत लाना।
माना जिंदगी की रहो में कुछ कांटे जरुर आते हे ,
हम हाथ रख देंगे और आप गुजर जाना॥
******प्यार का मारा ***प्या हमारा ********
राहुल कुमार पचोरी
पारसोला॥


नही थी जिंदगी जिनके बिना



पल ही एसा था की हम इंकार नही कर पाए ,


ज़माने के डर से इकरार नही कर पाए ,


नही थी जिंदगी जिनके बिना मुनासिब ,


छोड़ दिया साथ और हम सवाल भी नही कर पाए

राहुल कुमार पचोरी


******प्यार का मारा *********प्यार हमारा ************