कभी उसे भी मेरी यांद सताती होगी
अपनी आँखों में मेरे ख्वाब सजाती होगी,
वो जो हर वक़्त ख्यालों में बसी रहती है
कभी तो मेरी भी सोचो में खो जाती होगी,वो जिसकी राह में पलके बिछाई रहती हैं
कबी मुझे भी उसके पास बुलाती होगी,
लबो पर रहती है वो हर पल हंसी बन कर
तसवीर देख मेरी वो भी मुस्करती होगी,
वो जो शामील है मेरे गीत मेरे नघमो में
कभी तन्हाई में मुजको गुन गुनाती होगी,
जिसके लिए मेरा दिल बेकरार रहता है
मेरे लिए अपना चेन भी गवाती होगी,
जिसे इज़हार -ए-वफ़ा हर पल करना चाहूं
कभी इकरार तो वो भी करना चाहती होगी,
जिसके लिए मेरी हर रात है करवट करवट
कभी तो उसे भी नींद ना आती होगी,जिसकी उल्फत की शमा से है मेरा दिल रोशन
मेरी चाहत के वो भी दीप जलती होगी,
गम ए फिराक मेरा ही मुक़दर है या फिर
मेरी जुदाई उसे भी युही रुलाती होगी...काश वो नगमे हमे सुनाये ना होते
आज उनको सुनकर आंसू आय ना होते
अगर इस तरह भूल ही जाना था ,
तो इतनी गहराई से दिल में समाये न होते . *****राहुल कुमार पचोरी***************
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