शनिवार, सितंबर 26, 2009

नही थी जिंदगी जिनके बिना



पल ही एसा था की हम इंकार नही कर पाए ,


ज़माने के डर से इकरार नही कर पाए ,


नही थी जिंदगी जिनके बिना मुनासिब ,


छोड़ दिया साथ और हम सवाल भी नही कर पाए

राहुल कुमार पचोरी


******प्यार का मारा *********प्यार हमारा ************

1 टिप्पणी:

rahulkp09 ने कहा…

महफिल न सही तन्हाई तो मिलती है,
मिलन न सही जुदाई तो मिलती है,
कौन कहता है मोहब्बत में कुछ नही मिलता,
वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है
ye sab bate wahi samjta he ko pyar karne ki takat rakhta he.