रविवार, सितंबर 27, 2009

बदनाम



कभी तो चाँद आसमान से उतरे और आम हो जाये ,

तेरे नाम की एक खुबसूरत शाम हो जाये ,

अजाब हालत हुए की दिल का सोदा हो गया ,

मुहब्बत की हवेली जिस तरह नीलम हो जाए ,

में ख़ुद भी तुजसे मिलने की चाहत नही करूँगा ,

क्योंकि नही चाहता कोई मेरे लीये बदनाम हो जाये ,

उजाले अपनी यांदो के मेरे साथ रहने दो ,

जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाये ॥

राहुल कुमार पचोरी
*****प्यार का मारा *****प्यार हमारा *****

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