राहुल कुमार पचोरी
कभी तो चाँद आसमान से उतरे और आम हो जाये ,
तेरे नाम की एक खुबसूरत शाम हो जाये ,
अजाब हालत हुए की दिल का सोदा हो गया ,
मुहब्बत की हवेली जिस तरह नीलम हो जाए ,
में ख़ुद भी तुजसे मिलने की चाहत नही करूँगा ,
क्योंकि नही चाहता कोई मेरे लीये बदनाम हो जाये ,
उजाले अपनी यांदो के मेरे साथ रहने दो ,
जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाये ॥
*****प्यार का मारा *****प्यार हमारा *****


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