रविवार, सितंबर 27, 2009

हम कितने पागल हैं


फूलो को चुने की खातिर काँटों से जख्मी होते हैं ,

जो जोली में आ गिरते थे उन्हें चुने से डर जाते थे ,

जब बारिश बरसा करती थी ... हम छतरी में चुप जाते थे ,

और जलती धुप में नंगे पांव हम चत पर उछला करते थे ,

जब पास वो होता था तो, देख उसको ना सकते थे ,

जब दूर चला जाता था वो, हम आहट उसकी सुनते थे ,

जब सारी दुनिया सोती थी, हम चाँद से खेला करते थे ,

जब सारी दुनिया उठ जाती, हम थक कर सो जाते ,

हम कीतने पागल होते थे.... हम कैसे पागल होते थे ,

हम आज भी वेसे ही पागल हैं........

*<*<* बस तेरा नाम यही तो हैं *<*<*

राहुल कुमार पचोरी

******प्यार का मारा***** प्यार हमार *******

बदनाम



कभी तो चाँद आसमान से उतरे और आम हो जाये ,

तेरे नाम की एक खुबसूरत शाम हो जाये ,

अजाब हालत हुए की दिल का सोदा हो गया ,

मुहब्बत की हवेली जिस तरह नीलम हो जाए ,

में ख़ुद भी तुजसे मिलने की चाहत नही करूँगा ,

क्योंकि नही चाहता कोई मेरे लीये बदनाम हो जाये ,

उजाले अपनी यांदो के मेरे साथ रहने दो ,

जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाये ॥

राहुल कुमार पचोरी
*****प्यार का मारा *****प्यार हमारा *****

पगली लड़की डॉ. कुमार विशवाश द्वारा

अमावास की काली रातो में दिल का दरवाज़ा खुलता हैं ,
जब दर्द की काली रातो में आंसू के संग होता हे ,
जब पिछवाडे के कमरे में हम निपट अकेले होते हे ,
जब गाडिया टिक-टिक चलती हे सब सोते है हम रोते है ,
जब बार बार दोहराने से सारी यांदे चुक जाती है ,
जब उंच नीच समजने में माथे की नस दुःख जाती हे ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी गद्दारी लगता है ,
जब पोथे खाली होते हे जब हर कोई सवाली होते है ,
जब गजले रास नही आती अफसाने गली होते है ,
जब बांसी फीकी धुप समेटे दिन जल्दी ढल जाता है ,
जब सूरज का ल्स्खर चत से गलियों में देर से जाता है ,
जब जल्दी गर जाने की इच्चा मन ही मन घुट जाती है ,
जब कोलेज से गर जाने वाली पहली बस छुट जाती है ,
जब बेमन से खाना खाने पर माँ गुस्सा हो जाती है ,

जब लाख मना करने पर भी पारो पड़ने आ जाती है ,
जब अपना मनचाहा हर काम लाचारी लगता है ,
तब उस पगली लड़की के बिन मरना गद्दारी लगता है ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है ,

जब कमरे में सन्नाटे की आवाज सुनाइ देती है ,
जब दर्पण में आँखों के नीचे जाही दिखाई देती है ,
जब बडकी भाभी कहती हे कुछ सेहत का भी ध्यान करो ,
क्या लिखते हो लल्ला दिनभर कुछ सपनो का सम्मान करो ,
जब बाबा वाली बैठक में कुछ रिश्ते वाले आते हैं ,
जब साड़ी पहने एक लड़की का फोटो लाया जाता हैं ,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्धारी लगता हैं ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भरी लगता हैं ,


दीदी कहती हे उस पगली लड़की की कुछ ओकात नही ,
उसके दिल में भइया तेरे जैसा जस्बात नही ,
वो पगली लड़की मरी खातिर नौ दिन भूकी रहती है ,
चुप- चुप सारे व्रत करती है , पर मुझसे कभी न कहती है,
जो पगली लड़की कहती है में प्यार तुम्ही से करती
लेकिन में हूँ मजबूर बहुत अम्मा -बाबा से डरती हूँ ,
उस पगली लड़की पर अपना कुछ भी अधिकार नही बाबा ,
यह कथा- कहानी किस्से हैं कुछ भी तो सार नहीं बाबा ,
बस उस पगली लड़की के संग जीना फुलवारी लगता हैं ,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भरी लगता है ,
******प्यार का मारा********* प्यार हमारा************
राहुल कुमार पचोरी