
फूलो को चुने की खातिर काँटों से जख्मी होते हैं ,
जो जोली में आ गिरते थे उन्हें चुने से डर जाते थे ,
जब बारिश बरसा करती थी ... हम छतरी में चुप जाते थे ,
और जलती धुप में नंगे पांव हम चत पर उछला करते थे ,
जब पास वो होता था तो, देख उसको ना सकते थे ,
जब दूर चला जाता था वो, हम आहट उसकी सुनते थे ,
जब सारी दुनिया सोती थी, हम चाँद से खेला करते थे ,
जब सारी दुनिया उठ जाती, हम थक कर सो जाते ,
हम कीतने पागल होते थे.... हम कैसे पागल होते थे ,
हम आज भी वेसे ही पागल हैं........
*<*<* बस तेरा नाम यही तो हैं *<*<*
राहुल कुमार पचोरी
******प्यार का मारा***** प्यार हमार *******

