बुधवार, दिसंबर 30, 2009

उसके कदम


मुस्कुराये जब वो तोः सारी कायनात हंसा करती है,


पड़े उसके कदम जहाँ वो जगह जन्नत हुआ करती है,



दिल के सागर में एहसासों की एक लहर उठा करती है,

मेरी बदमाशियों पे जब वो “उफ़” कहा करती है






जो मुड़के देख ले बस एक नज़र तोः ज़िन्दगी थमा करती है,


उसके हर कदम की आहट पे ऋतुएं बदला करती है,






मेरे बिखरे से लफ्जों की ग़ज़ल बना करती है,


सुनके मेरे काफिये जब वो “उफ़” कहा करती है,






जब भी मिल जाए वो तोः खुशियाँ इनायत करती है,


अपनी प्यारी बातों से मन को छुआ करती है,






मेरी ज़िन्दगी की रहगुज़र को मंजिल मिला करती है,


सुनके मेरी दास्तान-ए-ज़िन्दगी जब वो “उफ़” कहा करती है,






खुदा ही जाने यह कैसी जुस्तुजू साथ मेरे हुआ करती है,


जितना रहता हूँ दूर उससे उतना ही वो मेरे करीब हुआ करती है,



यह कैसी कशिश उसके लफ्जों में हुआ करती है,




ज़िन्दगी से होती है मोहोब्बत जब वो “उफ़” कहा करती है.
 
 ******* राहुचोरी *******
  

शुक्रवार, अक्टूबर 16, 2009


दीपावली की हार्दिक शुबकामनाए ये त्यौहार आप सभी के जीवन में खुशाली लाये.
माँ लक्ष्मी आपको वो सभी सुख सम्प्रदा दे जिससे आप वंचित है .
मेरी भगवन से एक ही प्राथना है की वो सभी को अपना  मंगल आर्शीवाद दे.
और आप सभी दिवाली के शुब अवसर पर कुछ ऐसा काम करे जिससे आपके दिल को ख़ुशी मिले ,
दिवाली क्यों मनाते है -: जैन समाज का मानना है की उस दिन तीर्थंकर महावीर स्वामी का मोक्ष हुआ था.
और हिन्दू समाज का मानना है की उस दिन  श्री राम भगवान १४ साल का बनवास काट कर अयोध्या में आये
थे तो अयोध्या वासियों ने पुरे अयोध्या को दीपक से सजा लिया था उस दिन से हम दीपावली मन रहे है.
सबका अलग अलग मानना है लेकिन सबके दिल में एक ही चीज़ है और वो है प्यार मोहब्बत .
दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जो सभी उम्र के लोग इस त्यौहार का आनंद लेते है .
           आप सभी को मेरी तरफ से दीपावली की हार्दिक                                    शुबकामनाए .

                                                           राहुल पचोरी

गुरुवार, अक्टूबर 08, 2009

har mahfil bhi roygi har dil bhi royga , jahna dundoge meri kashti waha sahil bhi royega , itna pyar bikher dunga is zamane me , ki katl kar ke mera katil bhi royega

बुधवार, अक्टूबर 07, 2009

wo bachpan ki yaande


हा, यांद है मुझे बचपन का वो दिन ,
जब माँ घोटकर पिलाया करती थी ,
काली मिर्ची और नीम की कोमल पत्तिया और ,
में बहादुर बेटा और शाबाश सुनने के लिए पी जाता था ,
उस कड़वाहट को पिने के बाद मेरा मुस्कुराना ,
शायद माँ को बहुत अच्छा लगता था ,
और तब से लेकर मैं निरंतर,
सारी दुनिया की कड़वाहट पी रहा हु और मुस्कुरा रहा हु ,
लेकिन माँ आज मुझे ये कड़वाहट पीते देख कर ,
शाबाश नहीं कहती , अब शयद वो थक गई हैं अपने बेटे को
झूठमूठ का मुस्कुराते देख कर वो चाहती है की मैं
सारी कड़वाहट उखड कर फ़ेंक दू
उसके बाद में मुस्कुराऊ और वो कहे शाबाश ||



कुछ बाते भूली हुई
कुछ पल बीते हुए
हर गलती का एक नया बहाना
और फिर सबकी नज़र में आना
परीक्षा की पूरी रात जागना
फिर भी सवाल देख कर सर खुजलाना
मोका मिला तो अध्यपक की उड़ना
फिर दोस्तों के साथ चाय पिने जाना
उसकी एक जलक देखने रोज़ स्कूल जाना
देखते देखते उसकी यांदो में खो जाना
हर पल एक नया सपना
आज जो टूटा फिर भी है अपना
वो स्कूल के दिन
उन लम्हों में जिंदगी जी ली
यांद कर के उन पलो को , फिर जिंदगी भर मुस्कुराना .

    भीगी पलकों के संग मुस्कुराते हैं हम
    पल पल दिल को बहलाते हैं हम
    तू दूर हैं हमसे तो क्या हुआ
    हर सांस में तेरी आहट पाते हैं हम .

                                                          राहु कुमा चोरी
 ****** प्यार का मारा******प्यार हमारा******


मंगलवार, अक्टूबर 06, 2009

जिसके लिए मेरा दिल


            कभी उसे भी मेरी यांद सताती होगी 
        अपनी आँखों में मेरे ख्वाब सजाती होगी,
  
        वो जो हर वक़्त ख्यालों में बसी रहती है 
         कभी तो मेरी भी सोचो में खो जाती होगी,


         वो जिसकी राह  में पलके बिछाई रहती हैं
          कबी मुझे भी उसके पास बुलाती होगी,


        लबो पर रहती है वो हर पल हंसी बन कर
        तसवीर देख मेरी वो भी मुस्करती होगी,
   
       वो जो शामील है मेरे गीत मेरे नघमो में 
       कभी तन्हाई में मुजको गुन गुनाती होगी,


       जिसके लिए मेरा दिल बेकरार  रहता है
        मेरे लिए अपना चेन भी गवाती होगी,


       जिसे इज़हार -ए-वफ़ा हर पल करना चाहूं 
      कभी इकरार तो वो भी करना चाहती होगी,


     जिसके लिए मेरी हर रात है करवट करवट
     कभी तो उसे भी नींद ना आती होगी,


    जिसकी उल्फत की शमा से है मेरा दिल रोशन 
   मेरी चाहत के वो भी दीप जलती होगी,


  गम ए फिराक मेरा ही मुक़दर है या फिर
मेरी जुदाई उसे भी युही रुलाती होगी...





    काश वो नगमे हमे  सुनाये ना होते      
    आज उनको सुनकर आंसू आय ना होते
    अगर इस तरह भूल ही जाना था ,
   तो इतनी गहराई से दिल में समाये न होते .
      *****राहु कुमाचोरी***************
    @@@प्यार का मारा@@ प्यार हमारा  @@@

गुरुवार, अक्टूबर 01, 2009


दोस्तों उसके बारे में और क्या बताऊ , उसके बारे में जो कुछ कहू वो कम है या मेरे पास कहने को कोई शब्द नही , जो कहा वो उसकी तारीफ में कम है , जब मुझे पता चला की अब वो हमारे स्कूल में पड़ने आ रही है वो भी मेरी ही क्लास में दोस्तों उस समय मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था मुझे पता नही में मेरी खुशी किस तरह आपके सामने बयां करू , और जब वो पहली बार क्लास में आई थी तो उसकी कुर्सी ठीक मेरी दाई और थी हमारे बिच की दुरी सिर्फ़ एक कदम थी उस समय वो मुझसे बात नही करती थी क्योकि उसे पता था की में उसे पसंद करता हु और उसकी सहेलियों को भी पता था शायद यही कारण था वो मुझसे बात करने में शर्माती थी मेरे दोस्त भी मुझे छेड़ते थे वो समय मेरी जिंदगी का सबसे यादगार समय था , में उस समय को भुलाना चाहू तो भी नही भूल सकता , धीरे धीरे हम दोनों भी एक दुसरे से बातें करने लगे फ़िर में भी उसको बहुत छेड़ता था परेशान करता थाऔर दोस्तों इसमे बड़ी खुशी मिलती थी , और ये सिलसिला ज़्यादा समय तक नही चला और वो मुझसे नाराज़ हो गई ,

दोस्तों उसका तो हक़ बनता है । लेकिन वो नारजगी मुझे बहुत महंगी पड़ी, और मुझे उसके साथ पड़ने का मोका सिर्फ़ एक साल तक ही मिला इसके बाद में कुवैत आगया लेकिन दोस्तों मेरे दिल में उसके लिए मेरा प्यार कभी कम नही हुआ उसने उसके दिल में मेरे लिए सारे रास्ते बंद कर लिए लेकिन मेरे दिल के रास्ते उसके लिए हमेशा खुले हैं। मेरे इंडिया जाने के बाद मेने उसको मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन शयद मेरे प्यार की ही कुछ कमी रह गई होगी फ़िर दोस्तों उसकी शादी हो गई और उस समय मेरे दिल पर जो गुजरी दोस्तों उसको बारे मेरे कुछ नही लिख सकता मुझे हो सके तो माफ़ करना, लेकिन दोस्तों आज भी मेरे दिल मेरे उसके लिए प्यार है , मेरे सब कुछ भूल सकता हु बस पहले प्यार को नही दोस्तों ये मेरे प्यार की कहानी है

पल पल तरसता था उस पल के लिए ,

वो पल भी आया तो कुछ पल के लिए ,

सोचा था की उसे जिंदगी का हसीं पल बना देंगे ,

पर वो पल रुका भी तो एक पल के लिए ।

**********प्यार का मारा *********प्यार हमारा *********

राहुल कुमार पचोरी

बुधवार, सितंबर 30, 2009

meri kahani


दोस्तों आज में कुछ पर्सनल लाइफ के बारे में कुछ बताने जा रहा हु ।
दोस्तों जिंदगी में प्यार सब कुछ होता हैं , ये मेरा मानना हैं ।
क्योकि जिंदगी की शुरुवात ही प्यार से होती हैं ।
मेरा मानना है की हमे अगर बचपन में माँ बाप का प्यार नही मिला तो बचपन बेकार हो जाता हैं ,
जिसके सर से माँ बाप का साया उठजाता हैं ,
उसको अपनी जिंदगी में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं ,खेर माँ बाप का प्यार तो सभी को मिले ये मेरी भगवान से हाथ जोड़कर प्राथना हैं ,
आज में प्यार के बारे में , मेरी जिंदगी का एक अनुभव आपके सामने रखना चाहता हु,
दोस्तों बचपन में माँ बाप का प्यार तो बहुत मिला , लेकिन कहते हे ना बच्चा जेसे जेसे बड़ा होता हैं ,
वेसे वसे उसकी सोच भी बदल जाती हैं , ये सही हैं दोस्तों ,
में जब छोटा था तब से में किसी को कुछ हद तक पसंद करता आया हु ,
दोस्तों प्यार एक इसी चीज़ हे जो पता नही कब किसके साथ हो जाए
उस समय मेरी उम्र कुछ आठ या दस साल की थी तब हम जेनी स्कूल जाया करते थे ,
वह मैंने एक इसी लड़की को देख जो बिल्कुल मासूम सी थी ,
मन ही मन में यही सोच रहा था की राहुल ये तेरे लिए ही बनी हैं ,
दोस्तों उस समय तो मुझे प्यार क्या होता हे इसका सही मायना तो पता ही नही था ,
लेकिन फिर भी प्यार कर बेठा , सुना है की प्यार में उम्र की कोई सीमा नही होती बस प्यार हो जाता हैं ,
फ़िर भी में उससे बात करने की हिम्मत नही जुटा पाया ,
फ़िर ना जाने किस तरह वक्त बीतता गया जब में कुछ समजने लगा ,
तब में रोज़ उसकी सिर्फ़ एक जलक देखने के लिए दिन में दस बार उसकी गली में चक्कर लगाता वो जब मन्दिर जाती उसके साथ साथ मन्दिर जाना
दोस्तों ये तो एक पागलपन था फ़िर घर से पेसे चुराकर कर उसको चोकलेट देना और उसकी सहेलियों को भी
देनी, मन्दिर में एक दुसरे के सामने बैठाना, बार बार उसको देखना ,
भले ही वो मुझे ना देखती लेकिन अपने दोस्तों को कहना की उसने मुझे देखा,
और इन चोटी चोटी बातो से दिल को बड़ी खुशी मिलती थी , धीरे धीरे हम बड़े होते गऐ
उसी तरह मेरा प्यार भी उसके लिए बढता गया, उसको खुश देख कर भी खुश हो जाता था,
पर दोस्तों मुझे नही पता था की में उससे इतना प्यार करता हु ,
सच तो यह है की में उससे बहुत प्यार करता था शायद जिंदगी से भी ज़्यादा ,
वो भले ही मजाक समजती हो पर मेरे लिए इतना प्यार सब कुछ था ,
जब में अपनी दुकान पर बेठता था दोपहर में तो वो अपने पापा के लिए चाय लेकर
उनकी दुकान पर जाती थी में उसको एक नज़र से देखता था वो नज़रे जुका के वह से आगे
निकल जाती थी बस उसकी यही अदा मुझे बहुत पसंद थी वो बहुत भोली थी मासूम थी
और में उसका पागल दीवाना था , उसकी मासूमियत मुझे उसकी और आकर्षित करती थी ,
वो उस समय इतनी khubsurat नही थी लेकिन मेरे लिए सबसे खुबसूरत थी वो वो वो वो

दोस्तों उसके बारे में, में जो कुछ कहू वो कम हे बस इसी बात का तो गम हैं , जब मुझे पता चला की अब वो मेरे साथ एक
ही क्लास में आने वाली है दोस्तों उस समय मेरी जो खुशी थी शयद में उस खुशी को बयां नही कर सकता , जब वो पहली बार क्लास में आई थी तो उसकी जगह ठीक मेरी पास वाली कुर्सी पर थी हम दोनों के बिच का फासला सिर्फ़ एक कदम का ही था , उस समय वो मुझसे बात करने में शर्माती थी उसकी सहेलिया उसको परेशान करती थी और मेरे दोस्त मुझे छेड़ते थे . हम दोनों बी बाद में एक अच्छे दोस्त बन गए थे में भी उसके साथ बहुत मस्ती करता था कभी कभी उसको छेड़ता भी था लेकिन ये सिलसिला ज़्यादा समय तक नही चला बाद में किसी कारनवश मुझसे नाराज़ हो गई लेकिन दोस्तों में उससे कभी भी नाराज़ नही हो सकता हु मेरा तो पहला प्यार हैं वो मेरी जिंदगी थी वो उसके साथ पड़ने का मोका सिर्फ़ एक साल तक ही मिला इसके बाद में कुवैत आगया लेकिन दोस्तों उस एक साल में मानो मेने पुरी जिंदगी जी हे क्योकि जो वक्त चला जाता हे वो लोट कर वापस नही आता, में उससे इतना प्यार क्यो करता हु , शायद इसका जवाब मेरे पास भी नही हैं , दोस्तों किसी से अगर प्यार करो तो उसे कभी प्यार में धोखा मत देना कभी बेवफाई मत करना क्योकि इसके बाद जो ,
जो उसका हाल होता है वो सिर्फ़ वही समजता है जिसने ठोकर खाई है ,।
दोस्तों अभी मेरे पास उसका प्यार नही रहा उसने किसी और से शादी करली ,
लेकिन उसमे भी उसकी कोई गलती नही थी , वो उसके पापा से डरती थी ,
उनसे खुलकर बात नही करती थी , शयद यही वजह रही होगी जो आज
ये हाल हुआ है ,
मोहब्बत............... तो वो चीज़ हैं