गुरुवार, अक्टूबर 01, 2009


दोस्तों उसके बारे में और क्या बताऊ , उसके बारे में जो कुछ कहू वो कम है या मेरे पास कहने को कोई शब्द नही , जो कहा वो उसकी तारीफ में कम है , जब मुझे पता चला की अब वो हमारे स्कूल में पड़ने आ रही है वो भी मेरी ही क्लास में दोस्तों उस समय मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था मुझे पता नही में मेरी खुशी किस तरह आपके सामने बयां करू , और जब वो पहली बार क्लास में आई थी तो उसकी कुर्सी ठीक मेरी दाई और थी हमारे बिच की दुरी सिर्फ़ एक कदम थी उस समय वो मुझसे बात नही करती थी क्योकि उसे पता था की में उसे पसंद करता हु और उसकी सहेलियों को भी पता था शायद यही कारण था वो मुझसे बात करने में शर्माती थी मेरे दोस्त भी मुझे छेड़ते थे वो समय मेरी जिंदगी का सबसे यादगार समय था , में उस समय को भुलाना चाहू तो भी नही भूल सकता , धीरे धीरे हम दोनों भी एक दुसरे से बातें करने लगे फ़िर में भी उसको बहुत छेड़ता था परेशान करता थाऔर दोस्तों इसमे बड़ी खुशी मिलती थी , और ये सिलसिला ज़्यादा समय तक नही चला और वो मुझसे नाराज़ हो गई ,

दोस्तों उसका तो हक़ बनता है । लेकिन वो नारजगी मुझे बहुत महंगी पड़ी, और मुझे उसके साथ पड़ने का मोका सिर्फ़ एक साल तक ही मिला इसके बाद में कुवैत आगया लेकिन दोस्तों मेरे दिल में उसके लिए मेरा प्यार कभी कम नही हुआ उसने उसके दिल में मेरे लिए सारे रास्ते बंद कर लिए लेकिन मेरे दिल के रास्ते उसके लिए हमेशा खुले हैं। मेरे इंडिया जाने के बाद मेने उसको मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन शयद मेरे प्यार की ही कुछ कमी रह गई होगी फ़िर दोस्तों उसकी शादी हो गई और उस समय मेरे दिल पर जो गुजरी दोस्तों उसको बारे मेरे कुछ नही लिख सकता मुझे हो सके तो माफ़ करना, लेकिन दोस्तों आज भी मेरे दिल मेरे उसके लिए प्यार है , मेरे सब कुछ भूल सकता हु बस पहले प्यार को नही दोस्तों ये मेरे प्यार की कहानी है

पल पल तरसता था उस पल के लिए ,

वो पल भी आया तो कुछ पल के लिए ,

सोचा था की उसे जिंदगी का हसीं पल बना देंगे ,

पर वो पल रुका भी तो एक पल के लिए ।

**********प्यार का मारा *********प्यार हमारा *********

राहुल कुमार पचोरी

1 टिप्पणी:

गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी ने कहा…

जिन्दगी तो उसके साथ मुनासिब हो सकती थी पर !!!!!!!!!!!!
कुछ ऐसे काम जिन्दगी करने नहीं देती